इस्राईली सेना ने जो रिपोर्टें और आंकड़े पेश किए हैं वह पूरी तरह से भय, आतंक व कहानी है जिसने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह कल्पना से अधिक कुछ नहीं था और वास्तव में हद से ज़्यादा डर का नतीजा था। सोमवार को लेबनान की दक्षिणी सीमा पर जो कुछ ड्रामा हुआ उसकी कई समीक्षाएं की जा सकती हैं लेकिन उन सबका नतीजा एक हक़ीक़त है और वह यह कि ज़ायोनी सेना, इस्राईली राजनितिज्ञों और मीडिया के शब्दों में मज़ाक़ बन गई। पहले ही क्षण से इस्राईली और कुछ अरब मीडिया ने, जो ज़ायोनियों से भी बड़ा ज़ायोनी है, ख़बरें देना शुरू कर दीं जबकि इस तरफ़ से यानी न तो लेबनान की सरकार की तरफ़ से और न ही हिज़्बुल्लाह की तरफ़ से कोई ख़बर या बयान दिया गया।
इस बीच इस्राईली सेना के प्रवक्ता अविचाई अदरई के ट्वीट सबसे रोचक थे। उन्होंने अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों के घुसने और उनकी विध्वंसक कार्यवाहियों को नाकाम बनाने के लिए इस्राईली सेना के जवाबी हमले की बात की। दूसरा रोचक बिंदु कुछ अरब संचार माध्यमों की ओर से इस घटना के कवरेज के संबंध में है। अलअरबिया व अलहदस ऐसे दो टीवी चैनल थे जिन्होंने इस्राईली सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इस हमले में हिज़्बुल्लाह के चार लड़ाके मारे गए। यह ऐसी स्थिति में है कि इस्राईल तक के किसी रेडियो, टीवी या वेबसाइट ने यह ख़बर या इस जैसी कोई ख़बर नहीं दी थी।
इससे भी रोचक बिंदु ज़ायोनी सेना का अगला क़दम था जब उसने अपनी काल्पनिक झड़प के ख़त्म होने की घोषणा के बाद लेबनान की सीमा के क़रीब अवैध बस्तियों में रहने वालों की आवाजाही पर लगी पाबंदी हटा ली जबकि इससे पहले ज़ायोनी शासन और प्रतिरोधकर्ता बलों के बीच होने वाली झड़पों में इस्राईली सेना उन्हें आदेश देती थी कि वे झड़पें ख़त्म होने के कई घंटों तक अपने घरों या शरण स्थलों में रुके रहें। हास्यास्पद बात यह है कि ज़ायोनी सेना ने तुरंत ही अवैध बस्तियों में रहने वाले ज़ायोनियों से कहा कि वे सामान्य जीवन बहाल कर लें लेकिन इसी के साथ उसने यह भी कहा कि इस्राईल के सामने अभी अनेक समस्याएं हैं। इस बात से लेबनान की सीमा पर झड़प के संबंध में इस्राईल के वहम की पुष्टि होती है।
इस बीच जो चीज़ सबसे ज़्यादा विश्वसनीय व गंभीर थी, वह इस घटना के कई घंटे बाद तक प्रतिरोध का मौन था जबकि इस्राईल को हिज़्बुल्लाह की ओर से बयान जारी किए जाने का बेताबी से इंतेज़ार था। इससे पता चलता है कि अवैध बस्तियों में रहने वालों, इस्राईली मीडिया और कुछ ज़ायोनी राजनितिज्ञों को भी नेतनयाहू की सरकार पर भरोसा नहीं है और वे केवल हिज़्बुल्लाह की ज़बान से सच्चाई सुनने का इंतेज़ार करते हैं। "इस्राईल बीतना" पार्टी के प्रमुख लेबरमैन का बयान इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा था कि हिज़्बुल्लाह के एक लड़ाके की शहादत के कारण उत्तरी इस्राईल की स्थिति अनियंत्रित हो गई है। इसके अलावा ज़ायोनी संचार माध्यमों ने भी इस्राईली सेना के हास्यास्पद ड्रामे का ख़ूब मज़ाक़ उड़ाया।
इस आधार पर कहा जा सकता है कि सोमवार की घटना ने दिखा दिया है कि ज़ायोनी सेना, दमिश्क़ में किए गए अपने एक हवाई हमले में हिज़्बुल्लाह के कमांडर अली मोहसिन के शहादत पर हिज़्बुल्लाह के जवाब का इंतेज़ार कर रही है। इस्राईली सेना के इस बड़े सर्कस के चलते नेतनयाहू अपना एकमात्र ट्रम्प कार्ड यानी सुरक्षा को खो चुके हैं। रोम के एक दार्शनिक का कहना है कि "युद्ध का भय, ख़ुद युद्ध से बदतर है।" यह वाक्य पूरी तरह से ज़ायोनी शासन की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है और यह भी दिखाता है कि हिज़्बुल्लाह मानसिक व प्रचारिक स्तर पर किस हद तक तैयार है और यह श्रेष्ठता जंग के मैदान में मिलने वाली विजय से कम नहीं है। हिज़्बुल्लाह की ओर से मीज़ाइल नहीं बल्कि एक बयान की प्रतीक्षा में उत्तरी इस्राईल का अनियंत्रित होना और वहां का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाना अपने आपमें एक बड़ी जीत है।